Click on the “Options ”, it opens up the settings page. तेरी काली अंखियों से जिंद मेरी जागे....धड़कन से तेज़ दौड़ूं सपनों से आगे... शाहरूख का भी फेवरिट गाना - नैनों की चाल है, मखमली हाल है...नीची पलकों से बदले समां, To start receiving timely alerts, as shown below click on the Green “lock” icon next to the address bar. Do you want to clear all the notifications from your inbox? Story first published: Friday, December 6, 2019, 22:20 [IST]. सलमान खान ने रिजेक्ट किया 250 करोड़ का डील, ओटीटी पर रिलीज नहीं होगी उनकी फिल्म! Gaana offers you free, unlimited access to over 45 million Hindi Songs, Bollywood Music, English MP3 songs, Regional Music & Mirchi Play. Get Notified about the latest hits and trends, so that you are always on top of the latest in music when it comes to your friends. This song is sung by Sharif Parwaz. आंखें भी होती हैं दिल की ज़ुबां, बिन बोले, कर देती हैं, हालत ये पल में बयां..... आंखों की गुस्ताखियां माफ हो....तुम्हें देख के, झुकती हैं... उठी आंखें जो बात ना कह सकीं....झुकी आंखें वो कहती हैं! The song is a super hit song from the Movie Jai Ho. तेरे नैना. The duration of song is 05:17. दबंग 3 के मेकर्स ने 'नैना लड़े' के वीडियो के साथ इस सीजन को अधिक खास बना दिया हैं। आज रिलीज किए गए वीडियो में प्रशंसकों को चुलबुल पांडे की मासूमियत से भरपूर प्रेम कहानी से अधिक करीब से रूबरू करवाया गया है जिसने हमें फिल्म के लिए अधिक उत्साहित कर दिया है।, चुलबुल पांडे ने अपने सोशल मीडिया पर यह वीडियो शेयर किया है और लिखते है,"Dekhiye maasoom si Khushi ka beautiful sa gaana, #NainaLade", सलमान खान और सई के साथ मासूमियत से भरपूर रोमांस की शुरुआत करते हुए, इस गाने के लिरिक्स ने निश्चित रूप से दर्शकों को आकर्षित कर लिया है। वहीं, सोशल मीडिया पर यह गाना रिलीज के बाद से ट्रेंड कर रहा है। गाने को रिलीज़ के 30 मिनट के भीतर एक लाख बार देखा जा चुका था।, Dekhiye maasoom si Khushi ka beautiful sa gaana, #NainaLadehttps://t.co/e1AJo48KAi@arbaazSkhan @sonakshisinha @saieemmanjrekar @PDdancing @KicchaSudeep @nikhil_dwivedi @SajidMusicKhan @wajidkhan7 @javedali4u @adityadevmusic @danishsabri12 @SapruAndRao @SKFilmsOfficial, सभी गानों का Jukebox पहले ही रिलीज़ किया जा चुका है लेकिन इस वीडियो में आपको चुलबुल और ख़ुशी की प्रेम कहानी के बारे में अधिक गहराई से जानने का मौका मिलेगा। यह एक भावुक गीत है जो आपको निश्चित रूप से चुलबुल पांडे की ज़िंदगी के अतीत के बारे में जानने के लिए अधिक जिज्ञासु कर देगा।, हमें याद आए, नैना और आंखों से रोमांस करते कुछ बेहद प्यारे बॉलीवुड गीत। आप भी बना लीजिए अपनी नैना प्लेलिस्ट -, हमें यकीन है कि जिमी शेरगिल का ये बेहद रोमांटिक गाना आपके ज़ेहन में भी नहीं होगा। फिल्म थी हासिल. ऋतिक रोशन की वॉर सीक्वल? वेब शो टाइटल कंट्रोवर्सी: करण जौहर ने मधुर भंडारकर से मांगी माफी- 'मुझे पता है कि आप हमसे नाराज हैं'. करण देओल के साथ फिल्म में नजर आएंगे बॉबी देओल? The duration of song is 07:14. Mahindra-TVS Partnership: महिंद्रा फर्स्ट चॉइस ने की माय टीवीएस से साझेदारी, जानें, राजकोट के अस्पताल में हादसे पर पीएम मोदी ने जाहिर किया दुख, परिजनों के लिए जताया दुख, LIC : एक बार देने होंगे पैसे, हर महीने मिलेगी 36000 रु की पेंशन, IND vs AUS : 8 महीने बाद हुई दर्शकों की वापसी, 50 प्रतिशत भरा गया सिडनी क्रिकेट ग्राउंड, स्‍पाइडर बाइट से भी हो सकता है खतरनाक संक्रमण, जानें मकड़ी काटने पर क्‍या करें, ICSI CSEET RESULT NOVEMBER 2020: सीएस एक्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट रिजल्ट 2020 जारी,यहां देखें, OnePlus Nord का प्री-ऑर्डर अमेज़न पर 15 जून से होगी शुरू; इसको खरीदने वाले पहले बने, ऐतिहासिक और धार्मिक स्‍थलों का संगम : पठानकोट. सलमान खान की राधे होगी ओटीटी पर रिलीज? कैसा है तेरा संसार माँ मुझे इतना बतादेइतना बतादे धीर बधाँदे।समझ न आये, तू समझादे ।। कैसा है तेरा संसार.... (1) एक घर से डोली निकलेगी एक से अर्थी जाये।यहाँ खुशी शहनाई बाजे, उस घर मातम छाये।।क्यों ना इनके भाग्य जगादेसमझ न आये तू समझादे....कैसा है तेरा संसार माँ मुझे इतना बतादे, (2) दीपक घर घर में जलते हैं फिर भी क्यों अंधियारी।निर्धन के घर मातम छाया एक घर मने दिवारी।।इनके दीपक क्यों न जलादेसमझ न आये तू समझादे...कैसा है तेरा संसार माँ मुझे इतना बतादे, (3) एक सोता है भूखा घर में इक घर में मौज उड़ाये।माँ तेरी ये कैसी परीक्षा मेरी समझ न आये।।दुखियों के दुःख क्यों न मिटादेसमझ न आये तू समझादे...कैसा है तेरा संसार माँ मुझे इतना बतादे, (4) जो सच्चाई पर चलता है चैन नहीं वो पाये।साँची कहे सुने ना कोई, दुनिया हँसी उड़ाये।।इन आँखो के परदे हटादेसमझ न आये तू समझादे...कैसा है तेरा संसार माँ मुझे इतना बतादे, शैर - तारदे माँ तारदे सब भक्तों को तारदे।किस्ती फँसी मझधार मैं आकर पार करदे।।, दर्शन की मेरे मन में लगी है।दर्शन तू देजा माँ शेरावाली।।, (1) तुम्हारे दर पर कोई आया भिखारी।आ जाओ चढ़कर अम्बे शेर की सवारी।।बिगड़ी बनादे कलकत्ते वालीदर्शन तू दे जा माँ शेरावाली, (2) कहाँ पर मईया तूने देर लगाई।आकर के अम्बे माँ कर दो सहाई।।भक्तों की नैया तू ही रखवाली...दर्शन तू दे जा माँ शेरावाली, (3) मैया को जो कोई प्रेम से ध्याये।उसकी भी नैया माँ पार लगाये।।दुखियों के दुःख को हरने वाली...दर्शन तू दे जा माँ शेरावाली, (4) गोपाल मण्डल माँ तुमको मनाये।निशिदिन माँ तेरी ज्योति जलाये।।शर्मा की झोली भरो मैया खाली ...दर्शन तू दे जा माँ शेरावाली, देवी मैया का सजा है दरबारदर्शन को आये हरे-हरे दर्शन को आये सब जाती।, (1) बड़े-बड़े नैना मैया के कानन कुंडल सोहे।हाथ त्रिशूल भुजा बलशाली मेरे मन को मोहे।दर्शन को आये हरे-हरे दर्शन को आये सब जाती, (2) सिंह सवारी हो के माता भृकुटि तान मतबारी।चूड़ी भर भर हाथ पहन ली मेंहदी लग रही न्यारी।दर्शन को आये हरे-हरे दर्शन को आये सब जाती, (3) लाल चुनरिया ओढ़ के मैया दीख रही सतरंगी।दरवाजे की शोभा कर रहे सिंह खड़े हैं जंगीदर्शन को आये हरे-हरे दर्शन को आये सब जाती, (4) दया दृष्टि सब पर करती हो समता का व्यवहार।महावीर तो सेवक तेरा कर मैया उद्धार।दर्शन को आये हरे-हरे दर्शन को आये सब जाती, मेरी भोली मैया का सजा है दरबार, दरश को मैं तो जाऊँगी।, (1) ऊँचे पर्वत भवन बना है शोभा अपरम्पार।मैया मेरी बड़ी दयालू करती हैं बेड़ा पार।ऐरे मोको मैया के दरश की दरकार, दरश को मैं तो जाऊँगी।, (2) सोने का सिंहासन माँ का सावल पिण्डी शो है।हीरा जड़ी पहन के साड़ी सबके मन की मौहे।ऐरे कौंदा नगन को रहयो है जामें भार, दरश को मैं तो जाऊँगी, (3) बड़े बड़े नैना मैया के दीख रहे रतनोर।चौरासी घंटा लटके हैं मैया तेरे द्वारे ।ऐरे लाँगुर ढोर रहा है तेरी ब्यार, दरश को मैं तो जाऊँगी, (4) नौ देवी आय रही क्वार की माँ दर्शन को जाऊँ।दर्शन करूं प्रेम से माँ के चरणों शीश नवाऊँ।एर महावीर हो जायेगा तेरा तो उद्धार, दरश को मैं तो जाऊँगी, तर्ज- चन्दा के उजियारे में, धक धक जिया हमारे में, मैया तेरे द्वारे में, हो जाय पार सहारे में।मैं भी तेरे दर को जाऊँ दिल उमड़ा भाव हमारे में।, (1) ऊँचे पर्वत भवन बना माँ ध्वजा रही फहराई है।देश देश के आय रहे जाती श्याम घटासी छाई है।संग लाँगुर वीर हमारे में, लगा रहा जयकारे मैं,मैं भी तेरे दर को जाऊँ दिल उमड़ा भाव हमारे में, (2) लोग सुपारी, ध्वजा नारियल तो परमात चढाय रहे।शेरावाली के जयकारे मन से सभी लगाय रहे।याद करें तोय हारे में, लग जाय नाव किनारे में,मैं भी तेरे दर को जाऊँ दिल उमड़ा भाव हमारे में, (3) नव का पार लगादे मैय ये अरदास हमारी है।खता माँफ मेरी सब कर दे तू जग की महतारी है।महावीर के तनक इशारे में, पहुँची तेरे द्वारे में,मैं भी तेरे दर को जाऊँ दिल उमड़ा भाव हमारे में, तर्ज- मेरी कमर पड़ा लहराय चुटीला काली रेशम का, मन क्यो रहा तू घबड़ाय, माँ बैठी है खोल खजाने को।, (1) बिगड़ी को मात बनाती है।वह दौड़ी दौड़ी आती है।रही नंगे पैरों घाय, माँ बैठी है खोल खजाने को, (2) माँ इच्छा पूरी करती है।दुःखियों के दु:ख को हरती है।रही सबको गले लगाय, माँ बैठी है खोल खजाने को, (3) जो माँ की करता है भक्ति।उसको तो मिलती है मुक्ति।मन काहे रहा पछताय, माँ बैठी है खोल खजाने को, (4) महावीर विचार करो मन में।ब्याधा कट जाये एक क्षण में।भव सागर से तर जाय, माँ बैठी है खोल खजाने को, तर्ज - दुपहरी लटके दार वरना मेरौ किनने सजायो।, मेरे मन में खुशी अपार दरश में करने जाऊँगी।।, (1) माँ ने ओढ़ रखी है साड़ी।जामें नग दमकत है भारी।जापै छाय रही छटा अपार, दरश में करने जाऊँगी, (2) कानन में कुंडल दमकें।पैरों में बिछुआ खनकें।केशन पर अजन बहार, दरश मैं करने जाऊँगी, (3) है रही घंटन की घनघोर ।भवन में कूजें पपिया मोर।माँ की है रही जय-जयकार, दरश मैं करने जाऊँगी, (4) परसूं जाय चरण मैया के।संग मैं जाय रही मैया के।महावीर जुड़ रही भीड़ अपार, दरश मैं करने जाऊँगी, मैं तो आज जाय रही मैया के दरबार को जी।ऐजी मेरे हृदय में हम्बै मेरे हृदय में खुशी है अपार।।, (1) फुर्ती शरीर में मेरे अति आय गयी जी।ऐजी मोय जानौ है हम्बै मोय जानौ है मैया के द्वार।।मैं तो आज जाय रही मैया के दरबार को जी, (2) दुनिया का जाती आवे मैया दरश को जी।ऐरे अपने हाथों से हम्बै अपने हाथों से करूँगी श्रृंगार।।मैं तो आज जाय रही मैया के दरबार को जी, (3) भोग लगाऊ माँ का प्रेम से जी।ऐरे महावीर मोको तो हम्बै महावीर मोको तो दरश की दरकार।।मैं तो आज जाय रही मैया के दरबार को जी, सुन लो माता मेरी क्यों लगाली देरी, जल्दी आजामैया अपने दरश तू करा जा, (1) हैं नैना विकल मेरे भारी,वाट जो हैं हम मैया तुम्हारी,आश में हूँ तेरी, विनती सुनले मेरी हलुआ खाजा, (2) आदि शक्ति हो तुम महतारीअवतो रखलो ये लज्जा हमारीदिल मेरा विकल प्राण जायें निकल धैर्य दिलाजा, (3) नल की तुमने ही लज्जा संभारीमाँफ करदो सब गलती हमारीसब के संकट हरौ अब क्यों देरी करौ लाज बचाजा, (4) तुमको कहते सभी प्रति पालीमेरी झोली को छोड़ो न खालीमहावीर शर्मा कहें, ये हर्द्पुर रहें कर्तव्य निभाजा, तर्ज- दुपहरी लटके दार वरना मेरा किनने सजायो री, (1) मैया पंडन खूब सजाई।जापै अजब छटा है छाई।।आरत जाकी रहे उतार दरश को मैं तो जाऊँगी, (2) नैना माँ के बहुत विशाल।जाके गल मुंडन की माल।।दर पर ठाड़े सिंह अगार दरश को मैं तो जाऊँगी, (3) माता की सिंह सवारी।मृकुटि तान लगे मतवारी।।छवि साड़ी की अपरम्पार दरश को मैं तो जाऊँगी, (4) ओढ़ी माँ ने लाल चुनरिया।लगती जैसे कोई गुजरिया।।महावीर खुश हैं वे सुम्मार दरश को मैं तो जाऊँगी, (1) कर मैं ऐसी माँ को प्यार।दिखाया जिसने ये संसार।पिलाया अपना दूध अपार।बुलाने में दिखलाया प्यार।, (2) सिखाया चलना उसने मोय।।बात करने में जाती, भोय।प्यार वही दिया जो माँ का होय।दुःख में नैना लेय भिगोय।, (3) गुरु सबसे पहली है मैया।कराया ज्ञान पिता और भैया।दुःखों में पार लगाती नैया।स्वभाव में लगती जैसे गैया।, (4) आचरण शुद्ध दिया बतलाय।करना आदर दिया सिखाय।।अनुभव सारे दिये बताय।शिक्षण में रुचि दई बढ़ाय।ऐसी माता मिले महावीर मुझ को बारम्बार, देवी मैया का सजा है दरबार,दिखायला मोय हरे हरे दिखायला मोय लाँगुरिया, (1) देश देश से जाती आय रहे हैं रही जय जय कारमैया बैठी है बीच भवन में कर सोलह श्रृंगार, (2) सिंह सवारी होकर माता दीख रही मतवारीघंटन की घनघोर है रही ध्वनि लागत है प्यारी, (3) लाल चुनरिया ओढ़ रखी है माँ ने अपने तन परजाके भेंट करूँ मैया की मेरे आय रही मन पर, (4) भक्तन की प्रतिवाली मैया दया करत है छन मेंमहावीर ऐसी माता तो समाय गई है मेरे मन में, माता मैया के दरश को संग लिवाय चल लाँगुरिया।, (1) माता बड़ी दयालु है कर देंगी दु:ख दूरदेशाटन का लाभ तो मिल जाये भरपूरमिल जायेगा भरपूर माता की ओढू कामरिया, (2) पर जाके मात को देंगी भोग लगायध्वजा नारियल ले चलू माँ पर दऊँ चढायमाँ पर दऊँ चढाय संग में लेलऊँ गागरिया, (3) बारौ लाला गोद है जाकौ मुंडन दें करवायहवन करूँ माँ भवन में दीपक दऊँ जरायदीपक दऊँ जराय संग में ले लऊं सामरिया, (4) एक पंथ दो काज हों तोको रही समझायखर्च दुबारा नहीं पड़े रहा महावीर संग जायमहावीर संग जाय सहज ही कट जाय डागरिया, (1) आई हूँ बड़ी दूर से मैं समझाऊ तोय।दर्शन माँ के कर लऊँ नैक यतन बतादे मोय।देवी मैया के भवन की गैल बतइयो लाँगुरिया, (2) पैर में झाले पड़े हैं, हो गयी भारी तंग।इकली ही मैं चल पड़ी कोई न मेरे संग।देवी मैया के भवन की गैल बतइयो लाँगुरिया, (3) मैया के जाय भवन में दर्शन लूँ मैं पाय।ध्वजा नारियल संग हैं दूं मैं भेंट चढ़ाय।देवी मैया के भवन की गैल बतइयो लाँगुरिया, (4) मेरे मन की बात पर लांगुर करियो गौर।लड्डू तोय खवाऊँगी मिल जइयो याही ठौर।देवी मैया के भवन की गैल बतइयो लाँगुरिया, (5) मैया बड़ी दयालु हैं कर देगी दुःख दूर।महावीर बैठ भवन में दर्शन कऊँ भरपूर।देवी मैया के भवन की गैल बतइयो लाँगुरिया, शेरावाली मात शरण मैं तेरी आयौ।अलख लोक ब्रह्मण्ड जपै माँ भेदन न कोई पायौ।तेरे जुदा हुए का मैया हमको विरह सतायौ।।, (1) जब-जब भीड़ पड़ी भक्तों पर तूने दिया सहारौ।जिसने याद किया तुझो मैया सारा शंकट ढारौ ।वचन तेरा गया नहीं खाली।, (2) कर कर याद रोय रही मंझा उसकी लाज बचाई।सरस्वती भक्तन प्रतिपाली सिंह सजा कर लाई ।विपति तुमने नल की टाली।, (3) महावीर है दास तेरा माँ क्यों रही देर लगाई।।दुनियाँ इसको सता रही तू कर दे आय सहाई।।करो तुम जाकी रखवाली।, देवी मईया के भवन की गैल बता दे लांगुरिया।, (1) इत उत क्यों भागा फिरे नैक सुन मेरी बात।भवन बता माँ का मुझे जहाँ बैठी है मात।जहाँ बैठी है मात, बता दे मोको डागरिया।, (2) कर लूंगी में दर्शन माँ के हो गयी भारी तंग।इकली ही में चल दई कोई न मेरे संग।कोई न मेरे संग बताऊँ तोको बाबरिया।, (3) गोदी में लाला मेरे तीजा संग न कोय।टोसा में लड्डू धरे उन्हें खबाय दऊँ तोय।उन्हें खबाय दऊँ तोय प्रेम से खइयो सावरिया।, (4) माता के दर्शन करूँ दूँगी शीश नवाय।मन चाहा बर माँग लू जो महावीर को भाय।महावीर को भाय उमर से हो गयी झाझरिया।, मेरे उठे विरह की पीर भेज रही पाती तुम्हें बुलाने की।करियो न भूल माँ आने की।।, (1) तुम सिंह की मात सवारी हो।और सब जग की महतारी हो।अब तो आजा शेरावाली सब बदली रीति ज़माने की।, (2) तेरे दर्शन को नयना दूखे।तेरी याद में हम रह जाए भूखे।मनुआ तो भारी विचलित है कोई बात न मिले ठिकाने की।, (3) हलुआ पूड़ी बनवाय दूंगी।माँ तेरो भोग लगाय दूंगी।सारी चीजें सजा रखी हैं मैया तेरे खाने की।, (4) तू अपना सिंह सजाय लईयो।संग लांगुर वीर लिवाय लइयो।महावीर का ह्रदय हिलोरे ले माँ नई - नई तर्जे गाने की।, पका-पकाकर उदर अवा में सुदृण किया है।तेरे वक्ष स्थल से ही पयपान किया है।, मेरे रोने पर तुझको दुःख होता भारी।जाग-जाग कर रात बिता देती हो सारी।।, झुला-झुला बाँहों पर मुझ पर लाड़ लढ़ाया।लोरी गा-गाकर शान्ती का पाठ पढ़ाया।, तुतली बोली से मुझको मधुर दुलार दिया है।खुशियाँ हृदय में भर भाषा का उपहार दिया है।, शब्द अनेकों बार आपने हैं दुहराया।करा-करा अभ्यास आपने योग्य बनाया।।, रोना सुनकर दु:खी हुई सीना लिपटाया।भूख प्यास तज कर मुझ पर लाड़ लढ़ाया।।, गीले में सोकर सूखे में मुझे सुलाया।मेरी खातिर माता तूने कष्ट उठाया।।, हँसता देखा मुझे फूल सी तुम खिल जातीं।स्वर्ग से सुन्दर सुख का अनुभव आप करातीं।।, सर्व-प्रथम गुरु बन रिस्तों का ज्ञान कराया।आशीषों का हाथ आपने खूब बढ़ाया।।, अपने सारे अनुभव हमको दिये बताई।शिक्षा में स्नेह आपने दिया बढ़ाई।।, सुख किये न्योछावर तुमने मेरे ऊपर।कोटि कोटि प्रणाम मात सर चरणों धरकर।।, महावीर की विनय मात स्वीकार करो तुम।तेरे आशीषों से सदैव फूले फलें हम।।, नहीं उऋण तुमसे हो सकते हम महतारी।जन्म जन्म तुम मिलो लालसा यही हमारी।।, (1) आश दर्शन की माँ मेरे मन में लगी हैआज आकर बुझादे ये मन में लगीमेरा हृदय हरसे माँ दर्शन के बिनामन मेरा ये तरसे माँ दर्शन बिना, (2) तेरी महिमा को माँ हमने जाना नहींमुझको आता तेरे गीत गाना नहीन तरु त्यारे दर से माँ दर्शन के बिनामन मेरा ये तरसे माँ दर्शन बिना, (3) है निरंकार ज्योति में मैया मेरीपार कर दे फंसी आज नैया मेरीशीश काटूँ ये धड़ से माँ दर्शन बिनामन मेरा ये तरसे माँ दर्शन बिना, (4) आदि शक्ति में शक्ति है माँ अम्बे तूजगदम्बे जगत की जगदम्बे तूनैन कंचन के बरषे माँ दर्शन के बिनामन मेरा ये तरसे माँ दर्शन बिना, ऊँचे पर्वत आज मात ने अपनी झलक दिखाई है।सूरति मेरे मन भाई है।, (1) चुनरिया ओढ़ी माँ ने लाल।गले में है मुण्डन की माल।नाक में नथनी कमर कौंधनी छटा कही नहीं जाई है।सूरति मेरे मन भाई है।, (2) कानन कुंडल छवि न्यारी है।चक्र, सुदर्शन, ढाल सँभारी है।शंकट मोचन मात आप हैं भक्त रहे सब गाई है।सूरति मेरे मन भाई है।, (3) सरस्वती भक्तन प्रतिपाली।रम्यक मर्दन शैल व काली।मातंगी तारावचनेशी, ले मेरी लाज बचाई है।सूरति मेरे मन भाई है।, (4) अलख लोक ब्रह्माण्ड जपे तोय।विनती करूँ ज्ञान दे जा मोय।सिंह सवारी करके मैया महावीर की करो सहाई है।सूरति मेरे मन भाई है।, तेने पहनी चुनरि लाल मात तेरी लाल ध्वजा फहराय रही।सूरति मेरे मन भाय रहीं।, (1) तू पहने चूड़ी हाथ लाल ।है लाल ही टीका तेरे भाल।सिंहासन की लाल छटा माँ मेरे मनै लुभाय रही।सूरति मेरे मन भाय रही, (2) हथेली मेहंदी रची है लाल।पैरों का महावर लाल ही लाल।लाल ही लाली होंठ रचे माँ अजब कोटि छवि छाय रही।सूरति मेरे मन भाय रही, (3) है फूलों का श्रृंगार लाल।झूला की डोरी लाल लाल।झूला पर रही झूल मात मेरी लम्बी पैग बढ़ाय रही।सूरति मेरे मन भाय रही, (4) लाँगुर के कपड़ा लाल लाल।।महावीर की लेखनी करे कमाल।जो तेरी शरण में आ जाये वह लाल ही लाल खिलाय रही।सूरति मेरे मन भाय रही, (1) चैत मास की आय रही नौमी, मोपै रहयौ न जाय।जात करूंगी मैं मैया की, मन मेरौ ललचाय।मैया के जयकारों की मैं धूम मचाऊँगी।ले चलियो लाँगुर संग में मैं दौड़ी जाऊँगी, (2) ऊँचे पर्वत भवन बना है, ध्वजा रही फहराय।लाल चुनरिया, ध्वजा नारियल, जाती रहे चढ़ाय।मैं भी अपने मन के माफिक भेंट चढ़ाऊँगी।ले चलियो लाँगुर संग में मैं दौड़ी जाऊँगी, (3) जो भी याचक दर पर आया। खाली कभी न जवै।बड़ी दयालू दूर्गे मैया, सबको गले लगावै।मन की बातें महावीर मैं करके आऊँगी।ले चलियो लाँगुर संग में मैं दौड़ी जाऊँगी, मात भगवती आपको सुमिरू बारम्बार।विघ्न हरन मंगल करन कर मेरा उद्धार।मेरी रख लीजै लाज, मैया सारे हैं काज।।, (1) भक्तन की प्रतिपाली मैया आप गुणों की खान हो।अपने भक्तजनों का रखतीं रम्यक हरदम ध्यान हो।सच्चे दिल से याद करे जो रखती हो सम्मान हो।तुम भक्तों की रही सदा सहायक।, (2) विनती बारम्बार भगवती करो आप स्वीकार हो।घर घर तेरी होय आरती है रही जय जयकार हो।तुझको आज पुकारूँ मैया करो विघ्न से पार हो।मैं मूरख माँ तुम सब लायक।, (3) शैल, सुतेमा, माँ मातंगी अबज तुम्हारी शान हो।तारा वचनेशी भोरी माँ मुनि जन धरते ध्यान हो।मैं मूरख महिमा नहीं समझा नहीं हृदय में ज्ञान हो।महावीर है तेरा पायक।, तेरौ भवन बनौ है आलीशान दरश को धावै सर जाती।, (1) ऊँचे पर्वत भवन बना माँ शोभा अपरम्पार ।पंडा निश दिन करें आरती है रही जय जयकार।, (2) देश-देश के आवै जाती जुड़ रही भीड़ अपार ।हलुआ पूड़ी बटे भवन में है रही है ज्यौनार ।, (3) सिंहासन पर बैठी मैया नैना बडे विशाल।माँथे ऊपर बिंदिया शोहे दमक रहा है भाल।, (4) लोंग सुपाड़ी ध्वजा नारियल चढ़ रहे बेसुमार।महावीर चरणों का सेवक कर मैया उद्धार।, तेरौ भवन सजायौ मैंने मात पधारौ आय के भवन में, (1) नवम्भ लगाये हैं कला के पुष्प दिये बिखराय।दरवाजे पर रंग बिरंगी माल दई हैं लटकाय, (2) गोरी कलश सजा के लाईं दीये हैं भरवाय।धप दीप नौ वैद्य से मैया भवन दिया महकाय।, (3) चन्दन चौक पुरा के मैया आसन तेरौ लगायो।मखमल की चादर बिछवाकर तकिया संग लगायो।, (4) हलुआ पूड़ी बनी रखी हैं आके भोग लगाओ।वरद हस्त महावीर पर रखकर सेवक इसे बनाओ।, ओ वैष्णों माँ, तू है मेरी माँ,सुहाना लगे माँ तेरा द्वार, भक्त बोले जयकार ,द्वार लगे मेला हरबार,तू मेरी माँ.